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जहाज निर्माण परिचय

माडॉलि ने रक्षा तथा वाणिज्यिक दोनों ही क्षेत्रों के लिए विभिन्न पोतों का निर्माण किया है । कंपनी द्वारा निर्मित पहला आधुनिक युद्धपोत लिएंडर श्रेणी का फ्रिगेट ''आईएनएस नीलगिरि'' था । इसका रुपांकन ब्रिटिश एडमिरल्टी से प्राप्त किया गया था और इस फ्रिगेट का निर्माण यू.के. के मेसर्स विकर्स लिमिटेड तथा मेसर्स यारों (पोत निर्माता) लिमिटेड के सहयोग से हुआ था । नीलगिरि का जलावतरण अक्टूबर,१९६८ में तथा सुपुर्दगी १९७२ में हुई थी । अगले नौ वर्षो के दौरान माझगांव डॉक लिमिटेड ने भारतीय नौसेना के लिए इस श्रेणी के पॉच और युद्धपोतों का निर्माण और सुपुर्दगी का कार्य किया । भारतीय नौसेना युद्धपोत नीलगिरि, हिमगिरि, उदयगिरि दूनागिरि, तारागिरि एवं विन्ध्यागिरि ७० एवं ८० के बीच नौसेना के मुख्य शक्ति बने थे ।

लिएंडर श्रेणी का निर्माण समापन के करीब था, तो नौसेना ने नई पीढ़ी के युद्धपोत का रुपांकन विकसित किया । माझगांव डॉक नये युद्धपोत के संंबंध में सभी उत्पादन रुपांकन बनाने के लिए जिम्मेदार था । लिएंडर से भिन्न, नया युद्धपोत संरचना रुपांकन तथा निष्पादन में भारतीय था । यह पोत लिएंडर युद्धपोत की अपेक्षा लगभग ५ अधिक विस्थापन वाला था तथा इस पर दो बड़े हेलिकाप्टर उतारे जा सकते थे । इस नई श्रेणी का नाम ''गोदावरी श्रेणी'' रखा गया और इस श्रेणी के प्रथम युद्धपोत ''आईएनएस गोदावरी'' का जलावतरण मई १९८० में तथा सुपुर्दगी दिसंबर १९८३ में किया गया । इसके पश्चात आईएनएस गंगा तथा गोमती १९८५ तथा १९८८ में निर्मित हुए । आगे इस श्रेणी के युद्धपोतों का निर्माण कोलकाता के जीआरएसई को सौंपा गया जिसमें माडॉलि ने अपनी अग्रणी यार्ड सेवा प्रदान की ।

तत्पश्चात, विध्वंसक श्रेणी परियोजना-१५ के युद्धपोत निर्माण का कार्य लिया गया जो गैस टरबाइन से संचालित था । ये ६७०० टन विशाल विध्वंसक श्रेणी के युद्धपोत विश्व के इस भाग में निर्मित सबसे बड़े युद्धपोत है । इस श्रेणी का प्रथम आईएनएस दिल्ली का जलावतरण फरवरी,१९९१ में तथा सुपुर्दगी १९९७ में हुई, दूसरे आईएनएस मैसूर की सुपुर्दगी १९९९ में हुई । इस श्रेणी का अंतिम तीसरा युद्धपोत आईएनएस मुंबई जनवरी २००१ में नौसेना में शामिल हुआ ।

माझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड ने नौसेना के लिए दो कारवेट्स का निर्माण भी किया है । कारवेट छोटे आकार के युद्धपोत हैं जिनका वजन लगभग १५०० टन है । इस श्रेणी के पहले आईएनएस खुकरी की सुपुर्दगी १९८९ तथा दूसरे आईएनएस कुठार की जून १९९० में की गई। जीआरएसई कोलकाता में जलावतरण किया गया । आईएनएस किर्च की सज्जा माझगांव डॉक में की गई तथा जनवरी २००१ में सुपुर्द किया गया । माझगांव डॉक लिमिटेड ने नौसेना के लिए तेज तथा शक्तिशाली मिसाईल बोट का निर्माण भी किया है । तीन मिसाईल बोट आईएनएस विभूति, विपुल तथा नाशक की सुपुर्दगी नौसेना में वर्ष १९९१ से १९९४ के बीच की गयी । चौथे बोट आईएनएस प्रबल का जलावतरण सितम्बर २००० में किया गया और सुपुर्दगी मार्च २००२ में हुई ।

माझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड ने नौसेना के लिए कैडेट प्रशिक्षण पोत का निर्माण एवं सुपुर्दगी १९८६ में किया ।

वर्तमान में, माडॉलि तीन नये पीढ़ी के स्टील्थ युद्धपोत का निर्माण नौसेना के लिए कर रहा है जिन्हें परियोजना-१७ युद्धपोत नाम दिया गया है । इस श्रेणी के प्रथम पोत आईएनएस शिवालिक का जलावतरण अप्रैल २००३, दूसरे सतपुरा का जून २००४ और तीसरे तथा अंतिम सहयाद्रि का जलावतरण मई २००५ में किया गया । माडॉलि दिल्ली श्रेणी विध्वंसक के अनुवर्ती तीन पोतों का निर्माण भी कर रहा है । इस श्रेणी के प्रथम पोत ''आईएनएस कोलकाता'' का जलावतरण मार्च २००६ में किया गया और दूसरे पोत आईएनएस कोची का जलावतरण पैटून की सहायता से सितंबर २००९ में किया गया ।

नौसेना के लिए युद्धपोतों के अलावा माझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड ने तट रक्षा के लिए प्रतितट निगरानी पातों की एक श्रेणी का निर्माण भी किया है । ये पोत निगरानी,पोलिसिंग, खोज, बचाव अभियान के लिए देश के विशेष आर्थिक क्षेत्र हेतु विशिष्ट पोत हैं । इनमें प्रदूषण नियंत्रण के साथ-साथ अग्निशमन तथा दो हेलीकाप्टर ढ़ोने की क्षमता भी प्रदान की गई है । इन पातों का रुपांकन पूर्णरुप से माझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड द्वारा किया गया है । सात तटरक्षक पोत आईएनएस, विक्रम, विजय, वीर, वरुण, वज्र, विवेक तथा विग्रह जो आज तट रक्षक बेड़ा के मुख्य संबल हैं का निर्माण तथा सुपुर्दगी भारतीय तट रक्षक को दिसम्बर १९८३ से मार्च १९९० के बीच किया गया । इस श्रेणी के बाद के पोत गोवा शिपयार्ड में माडॉलि की अग्रणी यार्ड सेवाओं के अधीन निर्मित किए गये हैं । माझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड ने प्रतितट आपूर्ति पोतों की दो श्रेणियों का निर्माण भी ओएनजीसी के लिए पूरा किया है जिसमें सात पोत हैं ।

माडॉलि द्वारा सीमा सुरक्षा बल के लिए बीओपी की नई श्रेणी का कार्य शीघ्र ही लिया गया है । बीओपी तैरते हुए पुलिस स्टेशन है जिस पर चार तीव्र गति बोट होते हैं । माडॉलि ने ऐसे नौ पोतों का निर्माण एवं सुपुर्दगी किया है ।

माडॉलि ने वाणिज्यिक क्षेत्र के लिए विस्तृत श्रेणी उत्पाद विकसित किया है और विविध पोतों का निर्माण किया है जैसे, एक डाइविंग सपोर्ट वेजल तथा ओएनजीसी के लिए एक बहुउद्देशिय सहायक पोत यथा बन्दरगाह उपयोगी पोत/क्राफ्ट, १५ नग टग, ११ नग ड्रेजर, २ नग ९००० क्यूबिक एम.वाटर टैंकर, ३ - नग यात्री सहित मालवाहक पोत, ट्रालर बार्जेज के अलावा वास्तविक सेफ्टी तथा तैरता हुआ क्रेन का निर्माण किया है । आज माडॉलि एक विशेषीकृत २०० क्यूबिक आवर कटर सक्सन ड्रेजर का निर्माण ड्रेजर कार्पोरेशन आफ इण्डिया के लिए कर रहा है । कंपनी ने यह आदेश वैश्विक स्पर्धा के समक्ष जीता है ।

निर्यात मोर्चे पर, माझगांव डॉक ने ''प्रथम'' स्थान प्राप्त किया है । भारत में माडॉलि एक मात्र शिपयार्ड है जिसने विदेशी ग्राहकों के लिए महत्वपूर्ण संख्या में जहाजों का निर्माण किया है । वर्ष १९७४-७५ से कंपनी ने सिंगापूर,इरानी नौसेना, ब्रिट्रेन, खाड़ी देश, मोजाम्बिक के लिए पोतों का निर्माण एवं सुपुर्दगी किया है । हाल ही में, एक फ्रेंच कंपनी के लिए १६०० क्यूबिक एम एम सैंड ड्रेजर नाम कमांडेन्ट मोरटिनोल का निर्माण किया गया जो पूर्वी वेस्टइंडीज में फ्रांस के एक द्वीप क्षेत्र गावडेलोप से संचालित हो रहा है ।

वर्तमान में, माडॉलि, सिंगापूर की मेसर्स जीजीओएसपीएल के लिए दो बहुउदेशीय सहायक पोत निर्माण के एक निर्यात परियोजना पर कार्य कर रहा है । इसके पहले पोत ''ग्रेटशिप लक्ष्मी'' का जलावतरण फरवरी २०१० में किया गया ।

इस शिपयार्ड को सभी अन्तर्राष्ट्रीय वर्गीकृत संस्थाओं के साथ नये निर्माण एवं जहाज मरम्मत दोनों का पुराना अनुभव है माझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड का प्रबंधन टर्न की आधार पर तकनीकी रुप से चुनौतीपूर्ण परियोजना के निष्पादन के लिए अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग का स्वागत करता है और इसे समय पर अनेक संगठनों तथा निगमों को शामिल करके मिश्रित अनुबंधों को संचालन का अनुभव है ।

जैसा कि भारत का अग्रणी शिपयार्ड होने के कारण माडॉलि समय पर गुणवत्तापूर्ण जहाजों की सुपुर्दगी के लिए वचनबद्व है ।

विगत १८वीं शताब्दी में, माझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड एक छोटा मरम्मत यार्ड से आगे बढ़ते हुए आज देश का एक अग्रणी रक्षा शिपयार्ड है जो भारतीय नौसेना की मॉंगों को पूरा करने में सक्षम है जिसमें पनडुब्बी के साथ युद्धपोत निर्माण कार्यक्रम शामिल है । आज माडॉलि की आदेश बुक स्थिति विश्व के सबसे व्यस्त शिपयार्ड की है ।

समवाय कार्मिक

  • माझगाव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड,
    डॉकयार्ड रोड, माझगांव,
    मुंबई - ४०० ०१०, भारत
  • दूरभाष सं. :
    बोर्ड: २३७६ २०००, २३७६ ३०००,
    2376 4000

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