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पनडुब्बी यार्ड

१९८४ में भारत की प्रधान मंत्री श्रीमती इंदीरा गांधी ने एक पटि्टका का अनावरण किया और इस प्रकार माडॉलि का पनडुब्बी यार्ड अस्तित्व में आया । यार्ड नामकरण की वर्तमान प्रणाली को ध्यान में रखते हुए पनडुब्बी यार्ड को ईस्ट यार्ड नाम दिया गया । इसमें बढ़िया वायु संचारण, अच्छी प्रकाश व्यवस्था सहित ढ़का हुआ वर्कशॉप स्पैकिंग तथा नये आधुनिक सीएनसी मशीन, अहम पर्याप्त सेवा सुविधाएं और जर्मनी में प्रशिक्षित समर्पित युवा कार्यबल शामिल है । यह यार्ड शीघ्र ही कम्पनी में सबके आकर्षण का केन्द्र बन गया । पनडुब्बी निर्माण के स्पष्ट उद्देश्य से निर्मित पूर्व खंड शीघ्र ही समर्पित कार्य के माध्यम से अपने लिए एक निके (niche) का निर्माण किया जो गुणवत्ता का ध्यान रखते हुए तथा कार्यसूची का पालन करने की आकांक्षा सहित पूरा किया गया।

पूर्व खांड कार्मिकों के मन में बैठी कार्य संस्कृति ने उन्हे अच्छे कार्य स्थान पर बनाये रखा जब दो एसएसके श्रेणी पनडुब्बियों यानी आईएनएसएम शल्की तथा शंकुल का कार्य समाप्त हो गया तो पूर्व खंड को एक टाइप १२४१ आईआरई श्रेणी की मिसाईल बोट निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई । यद्यपि, यह रुसी मानक के अनुसार निर्मित करना था तो भी पूर्व खंड के शिल्पियों ने इसका बीड़ा उठाया और एक सुन्दर पोत की सुपुर्दगी की जो आज भी सक्षमता से राष्ट्र की सेवा कर रहा है ।

आधुनिक प्रौद्योगिकी से सुसज्जित और विशेष प्रशिक्षित कार्मिकों द्वारा संचालित पनडुब्बियों का निर्माण एवं पुनर्सज्जा माझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड के पूर्व खंड में किया जा रहा है । उन्नत स्टेट आफ द आर्ट मशीनरी के साथ एक इकाई की स्थापना की गई है जो पनडुब्बी निर्माण में कठोर गुणवत्ता मानक तथा शुद्धता को प्राप्त करने के लिए आवश्यक है ।

एक झलाई प्रशिक्षण स्कूल की स्थापना की गई है जिससे झलाई तकनीक तथा उच्च मानक प्रक्रियाओं को निरंतर अद्यतन रखते हुए विकसित किया गया है ।

पूर्व खंड, पूर्ण संगणीकृत आरेखन कार्यालय तथा सर्वोत्तम गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोगशाला जैसी सुविधाओं पर गौरव कर सकता है । प्रेसर हल फ्रेब्रीकेशन, बोरिंग, मशीनिंग हेतु विशेष प्रयोजन मशीन स्थापित की गई है । सूक्ष्म उच्च प्रौद्योगिकी उपकरण जैसे राडार, सोनार, पेरिस्कोप, हॉस्टेबल मास्ट, पनडुब्बी अग्निशमन प्रणाली (एसएफसीएस) तथा अन्य आदेश एवं नियंत्रक उपकरण व आयुध प्रक्षेपण प्रणाली सहित प्रतिष्ठापित की गई है ।

पनडुब्बी मरम्मत एवं आधुनिकीकरण

माझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड ने भारतीय नौसेना की एसएसके श्रेणी पनडुब्बियों के आधुनिकीकरण तथा पूनर्सज्जा का कार्य भी लिया है । इस प्रकार देश की संकट कालीन आवश्यकताओं को स्वदेशी रुप से पूरा किया है । पनडुब्बी यार्ड का ढ़का हुआ ड्राई डॉक पनडुब्बी मरम्मत के लिए एक आदर्श वातावरण प्रदान करता है । माझगांव डॉक ने पहली बार टाईप २०९ पनडुब्बी शिशुमार की स्वदेशी मध्यम पुनर्सज्जा निर्धारित अवधि दो वर्ष में पूरा किया है ।

उसी वर्ग की दूसरी पनडुब्बी शंकुश का पहला मध्यम पुनर्सज्जा सहित आधुनिकीरण प्रयोजन सफलतापूर्वक २००५ में पूरा किया है । माझगांव डॉक ने अपनी निपुणता रुस मूल की पनडुब्बी सिंधुरक्षक की लघु पुनर्सज्जा सफलतापूर्वक पूरा करके भी प्रमाणित किया है ।

स्कोर्पिन

स्कोर्पिन पनडुब्बी संयुक्त रुप से फ्रांस की डीसीएन तथा स्पेन की नावातियां द्वारा अति आधुनिक नौसेना प्रौ़द्योगिकी समाहित करके विकसित की गई है । पनडुब्बी के बीचो-बीच सबटीक्स एकीकृत युद्ध प्रणाली, उच्च संगणीकृत केन्द्रीय प्रबंधन प्रणाली है जो पनडुब्बी की सभी सेन्सर और आयुध की निगरानी करता है । प्रत्येक स्कोर्पिन पनडुब्बी में कुल ३१ घटक होंगे ।

पनडुब्बी, वास्तव में अंतिम स्टील्थ आयुध हैं। दशकों के सोनार प्रौद्योगिकी में प्रगति के बावजूद पनडुब्बियों का पता लगाना, खोजना (ट्रेकिंग) लक्ष्य करना बहुत ही कठिन है । विशेषरुप से हिन्द महासागर में जहाँ समुद्र में खारापन और अस्थिर जल तापमान के उष्मीय क्षेत्र की उपस्थिति से पनडुब्बी का पता लगाना बहुत कठिन है । स्कोर्पिन जैसी पनडुब्बी इस डिटेक्शन तथा काउन्टर डिटेक्शन के चाल को और कठिन बना देती है । बिल्कुल नीरव रुप से रुपांकित, स्कोर्पिन कई दिनों तक पानी के अंदर घूम सकती है । लाँग रेंज पैसिव सोनार सिगनल के माध्यम से समुद्र में चक्कर लगा सकती है जो अन्य पनडुब्बियों तथा युद्धपोतों की सामीप्य में उपस्थिति का पता लगाता है ।

अनुबंध

भारत तथा फ्रांस सरकार के प्रतिनिधियों द्वारा रक्षा मंत्रालय में लगभग ३.५ बिलियन मूल्य के अनुबंध पर हस्ताक्षर हुआ । इसे स्कोर्पिन परियोजना ७५ नाम दिया गया है । यह फ्रांस की नवीनतम पारंपरिक पनडुब्बी निर्माण प्रौद्योगिकी का माडॉलि के कुशल एवं अनुभवी शिल्पिओं द्वारा वास्तविक रुप में लाया जायेगा। यह परियोजना डीसीएनएस के एक काग्लोमेन्ट अरमारिस द्वारा नियंत्रित किया जा रहा है जो फ्रांस की तरफ से मुख्य ठेकेदार है और माडॉलि द्वारा स्पेन की नावॉतिया को भारत में नियुक्त किया गया है । इस तथ्य से निर्माण की जटिलता को समझा जा सकता है कि इस श्रेणी के पहले पनडुब्बी की सुपुर्दगी २०१२ में होगी और शेष अगले पाँच वर्ष में प्रतिवर्ष एक होगी । प्रौद्योगिकी हस्तांतरण में माडालि अभियंता तथा शिल्पिओं के साथ-साथ भारतीय नौसेना कार्मिकों का इन परिष्कृत पनडुब्बियों के संचालन तथा अनुरक्षण का प्रशिक्षण फ्रांस में देना शामिल है । स्कोर्पिन अभिसामयिक पनडुब्बी रुपांकन तथा निर्माण में राजकीय कला की शिल्पकारिता प्रस्तुत करती है । इसकी युद्ध प्रबंधन प्रणाली तथा निम्न ध्वनिक सही संकेत इसे अन्य समकालीन पनडुब्बियों में श्रेष्ठता प्रदान करते है ।

स्कोर्पिन निर्माण ने अभी विभिन्न प्रौद्योगिकी चुनौती को आकृष्ट किया और इस अवसर पर पूर्व खंड इसे दृढ़ता से स्वीकार किया है । इसके प्रयास पहले ही सार्थक होने लगे हैं और पूर्व खंड इस श्रेणी के पनडुब्बी निर्माण पथ पर बहुत आगे बढ़ गया है । नई प्रौद्योगिकी के साथ नये कार्य आते हैं और पूर्व खंड पर्याप्त रुप से उन्हें निर्धारित कार्यक्रम के भीतर झलाई स्टेशन तथा अन्य मशीनरी को निर्धारित समय के अंदर उन्नत करके, पूरा करने हेतु तैयार है । माडॉलि मूलभूत ढ़ांचा का आगे विस्तार किया जा रहा है जिससे स्कोर्पिन पनडुब्बियों के महत्वाकांक्षी सुपुर्दगी कार्यक्रम को पूरा किया जा सके । सूचना प्रौद्योगिकी, उत्पादन प्रक्रिया में प्रौद्यिगिकी हस्तांतरण, रुपाकंन निवेश, प्राप्ति योजना एवं गुणवत्ता आश्वासन के लिए अनिवार्य है । परियोजना के लिए, जहॉ तक संभव हो अधिकतम स्वदेशी आपूर्तिकर्ताओं को खोजने का प्रयास किया जा रहा है। माडॉलि द्वारा ये सभी कदम उठाए जा रहे हैं जिससे पनडुब्बी निर्माण में स्वदेशी आत्मनिर्भरता प्राप्त किया जा सके और देश की सामरिक महत्व की योजना को प्राप्त किया जा सके ।

पृष्ट अपडेड की अंतिम तिथि २२/०९/२०१५

समवाय कार्मिक

  • माझगाव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड,
    डॉकयार्ड रोड, माझगांव,
    मुंबई - ४०० ०१०, भारत
  • दूरभाष सं. :
    बोर्ड: २३७६ २०००, २३७६ ३०००,
    2376 4000

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